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Transcript
The full episode, in writing.
काले फर्श पर नंगे पाँव चलते हुए Simmy के पैरों में ठंड चुभ रही थी। चारों तरफ़ महंगा फर्नीचर और दीवारों पर लटकती लाखों की पेंटिंग्स, लेकिन आज इस भव्य ड्राइंगरूम में सिर्फ़ डर और लालच का साया था। सेंटर टेबल के पास बड़ी सी लेदर की सोफ़ा पर Sunil बैठा था, आँखों में अजीब सी साजिश की चमक। उसके चारों ओर नौ दोस्त, जिनमें से किसी की भी हिम्मत नहीं थी Simmy की तरफ़ देखने की। Simmy के हाथ काँप रहे थे, जैसे वो अभी फूट पड़ेगी।
Sunil की आवाज़ अचानक गूँजती है, “यार, तुम लोग सोचो एक बार। Sameer के पास पैंतालीस प्रॉपर्टी हैं, इतना बड़ा मेंशन है। और वो बिलकुल अकेला रहता है, न कोई आगे, न पीछे।” Rohan ने सिर झुकाते हुए धीरे से कहा, “बात तो सही है, Sunil। पर हम क्या कर सकते हैं, वो हमारा दोस्त है, अपना पैसा हमें थोड़ी न दे देगा।”
Sunil कुर्सी से उठता है, Simmy की ओर बढ़ता है, उसकी आँखें अब ठंडी, बेरहम हो चुकी हैं। “अगर हम उसे हमेशा के लिए रास्ते से हटा दें, तो ये सब कुछ हमारा हो जाएगा। बराबर का हिस्सा मिलेगा सबको, किसी को कभी पता नहीं चलेगा।”
Simmy की घबरा कर आवाज़ निकली, “तुम लोग पागल हो गए हो क्या? वो हमारा दोस्त है! पैसे के लिए तुम उसकी जान लोगे? मैं ये सब नहीं होने दूँगी।”
Sunil ने Simmy को दीवार से दबोच लिया, उसकी साँसें गरम और डरावनी थीं। “Simmy, अपना मुँह बंद रखना। अगर एक शब्द भी बाहर निकाला, तो Sameer से पहले तू जाएगी ऊपर। हम सब इसमें साथ हैं, और अगर तुमने कुछ किया, तो अंजाम बुरा होगा।”
Simmy ने आस पास देखा, कोई भी दोस्त उसकी तरफ़ नहीं देख रहा था। हर किसी की नज़र ज़मीन पर, जैसे उनकी आत्मा शर्म से मर चुकी हो। लालच ने सबको अंधा कर दिया था। Simmy के गालों पर आँसू बह रहे थे, उसने डरकर सिर हिला दिया—मौन स्वीकृति।
कुछ दिन बाद, ठंडी रात, सूनसान नदी के किनारे, दोस्तों ने Sameer को जन्मदिन मनाने के बहाने वहाँ बुलाया था। नदी की आवाज़ में उनके कदमों की आहट दब गई थी। अचानक Sunil और Rohan ने Sameer को धक्का देकर नदी के तेज़ बहाव में फेंक दिया।
Sameer चीखते हुए बोला, “बचाओ मुझे! Sunil, Rohan, प्लीज बाहर निकालो! मुझे तैरना नहीं आता!” उसका हाथ पानी में डूबते-उतराते उठ रहा था, आँखों में बेइंतिहा डर और ग़द्दारी का एहसास। लेकिन किनारे खड़े दोस्त बस हँस रहे थे। Sunil चिल्लाया, “अब डूब जा बेटा! तेरी सारी दौलत अब हमारी है।”
Simmy दूर अँधेरे में खड़ी थी, अपने कानों को हाथों से दबाए, आँखों से आँसू बहाते। Sameer की आवाज़ कमज़ोर पड़ती गई, और कुछ ही मिनट में वो लहरों में समा गया। उसका शरीर कभी नहीं मिला।
कुछ महीनों में दोस्तों ने Sameer की सारी प्रॉपर्टीज़ अपने नाम कर लीं—पैंतालीस बंगले, करोड़ों का बैंक बैलेंस, और वही विशाल मेंशन। हर रात पार्टियाँ होतीं, शराब, म्यूजिक, हँसी। लेकिन Simmy कभी बाहर नहीं आती, अपने कमरे में बंद, अंदर ही अंदर गिल्ट में घुलती।
एक रात, डिनर टेबल पर Priya ने Simmy की ओर देखा। “Simmy, तू अपना हिस्सा क्यों नहीं ले रही? इतना पैसा है, सब मज़े कर रहे हैं, तू क्यों रोती रहती है?”
Simmy की आवाज़ काँप रही थी, “ये पैसा हमारा नहीं है, Priya। तुम सब ने एक बेकसूर को मार डाला। मुझे इस खून के पैसे से एक रुपया भी नहीं चाहिए। ये सब पाप है।”
अचानक झूमर की लाइट्स झपकने लगीं। कमरे में बर्फ़ीली ठंड भर गई, सभी की साँसें धुएँ में बदल गईं। ग्रैंड सीढ़ियों के ऊपर एक भयानक काली परछाईं उभरी—Sameer की आत्मा लौट आई थी।
Agle kuch hafte, महल में सच्चा डर फैल गया। एक-एक करके सब दोस्तों के साथ अनहोनी हुई। Rohan अपने कमरे में गला घुटा हुआ पाया गया—कमरा अंदर से बंद, कोई दिखाई नहीं दिया। Priya को बेसमेंट की अंधेरी सीढ़ियों में कुछ खींच ले गया—उसकी चीखें दीवारों में गूंजती रहीं, फिर अचानक शांत हो गईं। Varun, Anu, और बाकियों को भी उनकी सबसे बड़ी डरावनी चीज़ों से मारा गया।
अंत में सिर्फ़ Sunil बचा। वो मेंशन के गेट से भागने की कोशिश करता है, लेकिन एक अदृश्य ताक़त उसे हवा में उठा कर, गर्दन तोड़ देती है। उसका शरीर फर्श पर गिरता है, और सब कुछ खत्म हो जाता है।
अब मेंशन हमेशा के लिए खामोश था, हर कोने में बर्फ़ीली धुंध, और हवा में गुनगुनाती अनकही चीखें। Simmy अकेली किचन के फर्श पर बैठी थी, गिल्ट और डर में डूबी, अपने अंत का इंतज़ार करती। रसोई में अचानक हल्की सी आहट हुई। Simmy ने देखा, Sameer का आत्मा उसके सामने खड़ा है—अब उसकी आँखों में सिर्फ़ उदासी थी, कोई डरावना रूप नहीं।
Simmy काँपती आवाज़ में बोली, “Sameer…”
Sameer ने नरमी से कहा, “Simmy, डरो मत। मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूँगा। मुझे पता है तुमने कुछ नहीं किया था, तुमने मुझे बचाने की कोशिश की थी, पर तुम्हारी जान को खतरा था। अब मैंने अपना बदला ले लिया है, मेरी आत्मा को अब शांति मिल गई है। मेरा समय पूरा हो गया, Simmy।”
Simmy की आँखों से आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। “Agar tum hi nahi ho toh mein kya karungi jee kar. Sab khatam ho gaya. Please mujhe bhi apne sath le chalo.”
Sameer ने सिर हिलाते हुए कहा, “नहीं, Simmy, ऐसा मत कहो। तुम्हें अपनी ज़िन्दगी जीनी चाहिए। मैं हमेशा चाहता हूँ कि तुम खुश रहो।”
Simmy ने बेबस होकर पीछे हटते हुए, किचन की दराज से एक तेज़ चाकू निकाला। Sameer की आत्मा बेचैनी में उसके सामने खड़ी हो गई, हाथों से उसे रोकने की कोशिश की, मगर उसकी आत्मा की उँगलियाँ Simmy के जिस्म से आर-पार हो गईं।
Sameer चीखा, “Simmy! नहीं! रुक जाओ! ये क्या कर रही हो!”
Simmy बोली, “तुम्हारे बिना इस दुनिया में मेरे लिए कुछ नहीं बचा है, Sameer। अब इस झूठी दुनिया में नहीं रहना।” और उसने चाकू अपने दिल में उतार लिया।
Simmy फर्श पर गिरती है, साँसें टूटने लगती हैं, लेकिन चेहरे पर एक शांत मुस्कान आ गई है। उसकी आँखों में Sameer की आत्मा की झलक थी। उसकी आख़िरी साँस के साथ, एक सुनहरी चमकदार रूह उसके शरीर से निकली। Sameer ने हाथ बढ़ाया, और इस बार, उनकी आत्माएँ सच में एक-दूसरे को छू सकीं। दोनों हाथों में हाथ डाले, उस डरावने महल से बाहर, उजाले की ओर चले गए।
South Asian popular media में इस तरह की कहानियाँ बार-बार गूँजती हैं—जहाँ दोस्तों या परिवार के बीच संपत्ति या विरासत के लिए विश्वासघात होता है, और फिर आत्मा लौटकर अपना बदला लेती है। 2008 में, Hansal Mehta द्वारा निर्देशित ‘Woodstock Villa’ में भी लालच, हत्या और धोखाधड़ी के ऐसे ही मोटिफ्स दिखाई देते हैं। फ़िल्म में Sikandar Kher, Neha Oberoi, Arbaaz Khan, Gulshan Grover, और Sachin Khedekar जैसे कलाकार थे, और कहानी में दोस्तों के बीच पैसे और प्रॉपर्टी के लिए षड्यंत्र, हत्या और धोखेबाज़ी प्रमुख थी। 30 मई 2008 को रिलीज़ हुई इस फ़िल्म का बजट ₹380 मिलियन था, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ़ ₹200 मिलियन ही कमा सकी।
‘Woodstock Villa’ में एक बेरोज़गार युवक, Sameer Shroff, पैसे की तंगी में एक महिला Zara Kampani का अपहरण करने की योजना में शामिल हो जाता है। योजना के दौरान, अचानक हत्या होती है और अपराध को छिपाने के लिए एक निर्दोष को फँसाया जाता है। इस कहानी में लालच की वजह से दोस्त एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं, और अंत में हर पात्र अपने किये की सज़ा खुद ही भुगतता है।
टीवी की दुनिया में, ‘Sasural Simar Ka’ (2011–2018) नामक धारावाहिक ने पारिवारिक ड्रामे में अलौकिकता की झलक मिलाई। सात साल तक चले इस शो में 2054 एपिसोड्स में एक संयुक्त परिवार के भीतर रिश्तों और संपत्ति के लिए लगातार चालबाज़ी और धोखा होता है। शुरुआत में आम ड्रामा था, लेकिन 2014 के बाद भूत-प्रेत, इच्छाधारी नागिन, डायन, जादू-टोना और पुनर्जन्म की कहानियाँ शामिल हो गईं। Simar और Roli, दो बहनों के ऊपर supernatural शक्तियाँ हमला करती हैं—घर में आत्माएँ, शैतान, और shape-shifting नागिन जैसे पात्र उनकी ज़िंदगी में तूफ़ान लाते हैं। Bharadwaj परिवार के सदस्य कभी जिंदा रहते हैं, कभी आत्मा बनकर वापस आते हैं, अपनी मौत का बदला लेने के लिए।
‘Sasural Simar Ka’ में डर और पाप का रिश्ता बार-बार उभर कर आता है। Prem की पत्नी Simar, कभी-भी किसी आत्मा के क़ब्ज़े में आ जाती है, कभी उसकी बहन रौली को मार दिया जाता है, तो कभी कोई डायन या भूत परिवार में घुस आता है। एक एपिसोड में, घर की बहु Roli की आत्मा अपने कातिलों से बदला लेती है—रात में अचानक घर की लाइटें बंद हो जाती हैं, दरवाज़े अपने आप खुलते-बंद होते हैं, और अपराधियों को उनके किये की सज़ा मिलती है।
इसी तरह 2019 के पाकिस्तानी सीरियल 'Ishq Zahe Naseeb' में भी गहरी मनोवैज्ञानिक और अलौकिक छायाएँ दिखती हैं। इसमें Zahid Ahmed द्वारा निभाया गया किरदार Sameer अपने बचपन के ट्रॉमा और गिल्ट के कारण dissociative identity disorder का शिकार होता है। उसके अंदर एक और ‘Sameera’ नामक आत्मा बस जाती है, जो sunset के बाद उसके ऊपर हावी हो जाती है। गिल्ट, ट्रॉमा और हिंसा की वजह से हर किरदार की ज़िंदगी पर मनोवैज्ञानिक साया छा गया है। Zoya नामक लड़की की बाल्कनी से गिरकर मौत हो जाती है, लेकिन असलियत में उसे Sameer की दूसरी पर्सनालिटी ‘Sameera’ ने धक्का दिया था। कहानी में बार-बार आत्मा, hallucination और अतीत के अपराध के बोझ की वापसी होती है।
‘Ishq Zahe Naseeb’ में गिल्ट और सज़ा के सवाल को मनोवैज्ञानिक और अलौकिक दोनों रूपों में दिखाया गया। जब Gohar को पता चलता है कि Sameer को बचपन में उसकी नौकरानी Shakra ने यौन शोषण किया था, तो वह भी एक आत्मा का रूप लेकर उसके ज़ेहन में जिंदा रहती है। Sameer के मन का अपराधबोध ही उसकी सबसे बड़ी सज़ा बन जाता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, क्रूरता, लालच और अपराध के हर पात्र के अंजाम में supernatural सज़ा जुड़ जाती है—कभी कानून से, कभी आत्मा के प्रकोप से।
South Asian popular media में murder-for-inheritance plots इतने आम हैं कि दर्शक जानते हैं—जहाँ संपत्ति की बात होगी, वहाँ जल्द ही कोई विश्वासघात करेगा, और उसके बाद किसी न किसी रूप में आत्मा, भूत या guilt वापस आकर सबकी ज़िंदगी तबाह करेगी। ‘Woodstock Villa’ से लेकर ‘Sasural Simar Ka’ और ‘Ishq Zahe Naseeb’ तक हर कहानी में यही पैटर्न है—greed, betrayal, murder, और फिर supernatural retribution।
इन सब कथाओं में, supernatural revenge सिर्फ डराने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक चिंता का रूप भी है। जब दोस्त या परिवारवाले पैसों के लिए एक-दूसरे को मौत के घाट उतारते हैं, तो आत्मा बनकर लौटने वाला मृतक दरअसल समाज की उस collective guilt और anxiety का प्रतीक बन जाता है, जो ऐसे अपराधों के बाद सबको तन्हा और बेचैन छोड़ जाता है। आत्मा की वापसी, hauntings, hallucinations—यह सब cultural anxieties और आम इंसान के मन की कश्मकश को एक भयानक, लेकिन गहराई से मानवीय रूप में पेश करता है।
2008 में रिलीज़ हुई ‘Woodstock Villa’ का बजट ₹380 मिलियन था, जो लगभग आज के समय में $4.5 मिलियन के बराबर है। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही और सिर्फ़ ₹200 मिलियन ही कमा सकी—शायद इसलिए कि दर्शकों को स्क्रीन पर दिखाया गया अपराध और उसका अंजाम, उनकी अपनी ज़िंदगी के डर और गिल्ट से बहुत मिलते-जुलते थे।
‘Sasural Simar Ka’ इंडिया का दूसरा सबसे लंबा चलने वाला टीवी सीरियल बना, 2054 एपिसोड्स के साथ। इस शो ने दर्शकों को जकड़ कर रखा—2016 के दूसरे हफ्ते में 13.46 मिलियन impressions मिले, जो उस वक्त के टॉप 5 टीवी शोज़ में शामिल था। इस शो ने 2014 के बाद अपने पारिवारिक ड्रामे में इतने supernatural elements जोड़े कि एक बार तो Simar को श्राप लगने के बाद housefly में बदल दिया गया था—भारत की जनता ने सीरियल की इस ‘अलौकिक’ उड़ान को भी खूब देखा।
2019 में ‘Ishq Zahe Naseeb’ ने पाकिस्तानी टीवी पर taboo topics को छूने की हिम्मत दिखाई—acid attack, sexual abuse, split personality disorder जैसे विषयों को अलौकिक और मनोवैज्ञानिक revenge के narrative में पिरोया। Zahid Ahmed को Best Actor - Critics का खिताब मिला, और इस शो की mysterious storyline और mental health की portrayal को critics ने खूब सराहा।
इन कहानियों की सबसे डरावनी बात यह है कि अपराधी कभी सज़ा से नहीं बच पाता—कानून चाहे उसे छोड़ भी दे, आत्मा या अपराधबोध कभी पीछा नहीं छोड़ते। South Asian popular media में supernatural revenge एक cultural metaphor है—जहाँ guilt, justice और trust के टूटने का डर, भूत और आत्मा के रूप में लौटता है। Betrayal के बाद hauntings, guilt के बाद hallucinations—कहानी हमेशा वहीं खत्म होती है जहाँ से शुरू हुई थी—एक खाली, सन्नाटे से भरा mansion, उसमें गूँजती उन आत्माओं की आवाज़ें जो कभी चैन से नहीं सो सकीं।